वक़्त की क़ैद में; ज़िन्दगी है मगर... चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं....

Friday, December 26, 2008

कुछ यूँ भी तो सीखें !!!

'क' से 'कंगन' , 'ख' से 'खन-खन'
'ग' से 'गजरे' बालों पे
'घ' से 'घर' छूटा मेरी जां
फूल खिले जब डालों पे।


'च' से 'चंदा', 'छ' से 'छत पर
'ज' से 'जब' जब आए है
'झरने' की 'झंकार' सी 'झ' से
छुप छुप के मुस्काये है।


'ट' से 'टूटा' एक सितारा
'ठ' से 'ठुमरी' हंसना तेरा
'ड' से 'डाली' झूलों वाली
'ढ' से 'ढूंढो' चैन बसेरा।


'त' से 'तुम' जब भी दिखती हो
दिल 'थ' से क्यों 'थम' सा जाए
'द' से 'दिल' में दर्द बहुत है
'ध' - 'न' साथ तो 'धड़कन' हाय।


नशे में डूबी 'प' से 'पलकें'
'फ' से 'फूलों' वाली खुशबू
'ब' - 'बाहर' और 'भ' से 'भीतर'
'म' से 'मुझ' पर तेरा जादू।


'य' - 'र' से 'या' 'रब' सुन ले तू
'ल' से 'लाल' लबों की लाली
सब कुछ भूले, भुला न पाये
'व' से 'वो' कलकत्ते वाली।


'श' से इतना 'शोर शराबा'
'स' से 'सागर' सरहद सरगम
'ह' से 'हाल-ऐ-दिल' तो यही है
कुछ तुम सीखो, कुछ सीखें हम।


'ह' से 'हाल-ऐ-दिल' तो यही है

कुछ तुम सीखो, कुछ सीखें हम।

3 comments:

  1. यूँ भी सीख लेंगे ऐसा क्या बुरा है यह,वाह!

    ---
    चाँद, बादल, और शाम
    http://prajapativinay.blogspot.com/

    ReplyDelete