वक़्त की क़ैद में; ज़िन्दगी है मगर... चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं....

Saturday, December 13, 2008

साथ चल देंगी.......

ज़रा फैला तो अपने 'पर', हवाएं साथ चल देंगी
ज़रा कर रूह खून-ऐ-तर; फिज़ाएँ साथ चल देंगी।

दबा मत सिसकियों को 'हार' जो आगोश में जकड़े
इन्हें दे 'इन्किलाबी स्वर'; सदायें साथ चल देंगी।

समंदर के सफर में आंकड़ों की बात बेमतलब
उछल के खोल दे लंगर; दिशाएँ साथ चल देंगी।

बहुत मुश्किल से हमने 'बा-वफ़ाई' सीखी है यारों
कहीं जो फिर गया ये 'सर'; वफायें साथ चल देंगी।

मुंह फेर के 'माँ' घंटों मुझसे रूठी रहेगी
कदम पर ज्यों ही छोड़ें घर; दुआएं साथ चल देंगी।

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