वक़्त की क़ैद में; ज़िन्दगी है मगर... चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं....

Monday, December 14, 2009

रुबाई -- (६)

ऐसे मजनुओं से प्यार के मौसम संवरते हैं?
जो केवल इश्क करते हैं; वो पत्थर खा के मरते हैं॥
ओ लैला, सोच कर कहना तू किसका कद हुआ ऊंचा
के हम तो नौकरी और इश्क़ दोनों साथ करते हैं॥

4 comments:

  1. नौकरी और इश्क दोनों एक साथ ...
    कहीं इश्क ही तो नौकरी नहीं है ....:).....

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  2. kadwa sach....beautifully described

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