वक़्त की क़ैद में; ज़िन्दगी है मगर... चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं....

Saturday, October 17, 2009

आकाश की दिवाली....

तारों का कोई गुट रहा होगा
चौक पर जो जुट रहा होगा

रंग ओढी अल्पना के पास
नूर का झुरमुट रहा होगा

आतिशफिशां माहौल है कल से
तम का दम तो घुट रहा होगा

चांदनी माहिर है 'पत्तों' में
चाँद पक्का लुट रहा होगा

रात जल के गिर रही होगी
और पर्दा उठ रहा होगा

6 comments:

  1. Chaand pakka lut raha hoga...waah :)

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  2. सुन्दर रचना, वाह!

    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    सादर

    -समीर लाल 'समीर'

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  3. वाह बहुत अच्छे....क्या खूब लिखा है ....!!

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  4. चांदनी माहिर है 'पत्तों' में
    चाँद पक्का लुट रहा होगा...amazing lines....

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  5. चांदनी माहिर है 'पत्तों' में
    चाँद पक्का लुट रहा होगा

    विशाल साहब हर बार आप लाजवाब कर देते हैं इतनी अनोखी कल्पनाओं को पेश कर के..हम तो पक्का लुट गये..
    और इस शेर के लिये हमारी भी शुभकामनाएं लें..
    आतिशफिशां माहौल है कल से
    तम का दम तो घुट रहा होगा

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