वक़्त की क़ैद में; ज़िन्दगी है मगर... चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं....

Thursday, August 27, 2009

ज़ख्म बहुत गहरा है शायद.....

हमने उसकी आँखें पढ़ ली; छुपा कोई चेहरा है शायद
वो हर बात पे हंस देती है; ज़ख्म बहुत गहरा है शायद॥

गुमसुम यादें; घायल माज़ी*, सालों से हैं सखियां उसकी
कच्ची नींद उचट जाती है; ख़्वाबों पे पहरा है शायद॥

शहर जला क्यों घर बिखरा; पगली आकाश से पूछ रही है
कौन उसे जा कर समझाए; आसमान बहरा है शायद॥

सारी उलझन, सब बेचैनी, और जो धुंधला-धुंधला ग़म है
आंसू बन के बह जाने दो; पलकों पे ठहरा है शायद॥

वो हर बात पे हंस देती है; ज़ख्म बहुत गहरा है शायद....

*माज़ी = Past

15 comments:

  1. Nice...my favourite would be "aasmaan behra hai shaayad"...that is a nice way to express the extent of hopelessness..

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  2. बहुत बेहतरीन!

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  3. have n't been able to think of a better adjective than SUPERB :)

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  4. bahut umda/ behatareen. shubhkaamnaon ke saath badhai.

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  5. Hi, you don't know me, I got this link through your brother, Kunal. This, is, some truly exceptional writing.

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  6. This comment has been removed by the author.

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  7. Super stuff vishal...

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  8. सारी उलझन, सब बेचैनी, और जो धुंधला-धुंधला ग़म है
    आंसू बन के बह जाने दो; पलकों पे ठहरा है शायद॥

    आपकी ग़ज़ल पढ़ कर बहूत अच्छा लगा ...............

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  9. bahut umda
    vishal . waise main apki profile me ek line kakayil ho gya.

    A poet and Dreamer by heart.... who incidentally works on Excel sheets to stay alive.
    maine bhi kabhi likha tha
    ki
    din to becha hai pet ki khati
    raat tere liye bachayi hai .

    badhayi sweekaren .

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  10. *Satya... --- Bahut Khoobsurat Sher farmaaya aapne.....

    I had read somewhere.... "Ghazal Tumse Mohabbat hai, Magar Is Pet Ki Khaatir / Kalam Kis Par Uthaana tha; Kalam Kis Par Uthaate Hain //

    Ajab Duniya hai Naashaayr yahaan par Sar Uthaate hain / Jo Shaayar hain, wo Mahfil mein, Dari-Chaadar Uthaate Hain //

    Not very sure... but I guess the writer is MUNAVVAR RANA...

    Cheers ...

    Vishal Gaurav

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  11. हमने उसकी आँखें पढ़ ली; छुपा कोई चेहरा है शायद
    वो हर बात पे हंस देती है; ज़ख्म बहुत गहरा है शायद॥ dil ko choo gyee ye pankatia...

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  12. mujhi pe likhi ho jaise :)

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