वक़्त की क़ैद में; ज़िन्दगी है मगर... चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं....

Thursday, January 8, 2009

शायद अँधा गीता पढने वाला है....


बहरे सारे लाइन लगा कर बैठ गए
शायद अँधा गीता पढने वाला है।

गूंगे देखो चीख रहे हैं साहिल पर
'दरिया का पानी ऊपर बढ़ने वाला है'।

मैखाने में देख के 'मुल्ला' साकी सोचे
भोर भये; क्या रूप ये गढ़ने वाला है !

ये तूफ़ान से पहले का सन्नाटा है
फिर कोई इसू सूली चढ़ने वाला है।

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