वक़्त की क़ैद में; ज़िन्दगी है मगर... चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं....

Sunday, June 20, 2010

ज़िद्दी ख़ून उबल पड़ता है ....

ज़िद्दी ख़ून उबल पड़ता है 
जब साँसों पे बल पड़ता है


जगी आँख का सोया सपना 
नींद में अक्सर चल पड़ता है


एक शरारा बुझे तो कोई 
और शरारा जल पड़ता है 


आंसू ज़ाया ना कर 'काफ़िर'
हवन में 'गंगाजल' पड़ता है...

16 comments:

  1. Wow!!! I just loved these lines

    जगी आँख का सोया सपना
    नींद में अक्सर चल पड़ता है

    Megha

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  2. bahot achha likha aap ne
    shukriya

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  3. sapne wala sher zabardast hai.. Great

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  4. बहुत खूब कहा है आपने...एक आध शेर और जोड़ दें तो ग़ज़ल मुकम्मल हो जाए...
    नीरज

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  5. @ Neeraj Jee --- Pahle to Aapka Bahut Bahut Shukriya...

    Ek Sher Aur Likha to tha; par baad mein Hata Diya tha... (Shaayad theme ke saath Gel nahiin Kar Raha tha)

    माज़ी के सौदागर; कितने
    भाव में 'गुज़रा कल' पड़ता है?

    Shaayad Aap Meri Ghazal mein 8 lines ki jagah minimum 10 lines expect kar rahe the...

    Waise 8 Lines ki Ghazal ka Trend Aa Chuka hai..Aur Bade Shaayar bhi 8 lines ki Ghazal Likh Dete hain...

    Ek Ghazal (8 Lines ki) misaal ke taur par...


    Tumko dekhaa to ye kayaal aayaa
    zindagii dhuup tum ghanaa saayaa


    aaj phir dil ne ek tamannaa kii
    aaj phir dil ko hamne samjhaayaa


    tum chale jaaoge to sochenge
    hamne kyaa khoyaa- hamne kyaa paayaa


    ham jise gungunaa nahiin sakte
    Waqt ne aisaa geet kyuun gaayaa



    (Written by Javed Akhtar)

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  6. यूँ तो एक भी अच्छा मिस्रा ग़ज़ल को मुकम्मल कर देता है.फिर यहाँ तो एक से एक मिस्रे हैं..बेहतरीन गज़ल..हमेशा की तरह !

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  7. ओह क्या कहूं ! एक से एक बढ़कर शेर है .... मान गए उस्ताद !

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  8. You have a very good blog that the main thing a lot of interesting and beautiful! hope u go for this website to increase visitor.

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  9. I liked the whole ghazal.......probably best sher is 'makta'

    आंसू ज़ाया ना कर 'काफ़िर'
    हवन में 'गंगाजल' पड़ता है...

    excellent!

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  10. बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल...हर शेर पर वाह करने को जी चाहे......

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  11. जगी आँख का सोया सपना
    नींद में अक्सर चल पड़ता है



    आंसू ज़ाया ना कर 'काफ़िर'
    हवन में 'गंगाजल' पड़ता है...
    bahut khubsurat likha aapne...

    mere aankhon me jaise sapna sa koi palta hai,
    jinke junun me mera shaamo-sehar dhalta hai
    wo mile-n-mile koi baat to n hogi,
    unki yaadon ka saaya mere aaath saath chalta hai...vishai ji aese malum pdta hai ki aapne vhabnaao ko panno pe utar diya ho...

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  12. जगी आँख का सोया सपना
    नींद में अक्सर चल पड़ता है

    ye sher akele kafi hai das gazalon ke samne...
    umda likha hai Vishal ji....badhai :)

    naimitya.blogspot.com

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  13. ज़िद्दी ख़ून उबल पड़ता है
    जब साँसों पे बल पड़ता है


    जगी आँख का सोया सपना
    नींद में अक्सर चल पड़ता है


    एक शरारा बुझे तो कोई
    और शरारा जल पड़ता है


    आंसू ज़ाया ना कर 'काफ़िर'
    हवन में 'गंगाजल' पड़ता है...waah kitna achha likha hai aapne.....jagi aankho ka soya sapna nindo me chal padta hai...bahut pyari lane hai....namaste

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  14. नमश्कार विशाल जी! मैं पिछले आधे घंटे से आपकी विभिन्न कविताएँ पढ़ रही हूँ और काफ़ी प्रभावित हुई हूँ| आपकी कविताओं में कुछ तो है जो दिल को छू जाता हैं| आप बस ऐसे ही लिखते रहे|
    धन्यवाद!

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