परी के किस्से, ग़ज़ल की खुशबू; लहर की थपकी, सहर का जादू
रख आया है शायर सब जज़्बात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में
तुम ही कहो ना, कैसे लिपटी रात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में ॥
चाँद की चोटी, धूप के गजरे; बंधे 'रिबन' से शाम के नखरे
लटों में उलझी कुदरत की सौगात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में
तुम ही कहो ना, कैसे लिपटी रात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में ॥
हल्की बूँदें, रात अंधेरी; मद्धम धुन पर, चलती गाड़ी
नज़र मिली उफ़्फ़... 'मेरा बांया हाथ' तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में
तुम ही कहो ना, कैसे लिपटी रात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में ॥
ज़ुल्फ बादल, ज़ुल्फ झरना; ज़ुल्फ बोली, 'प्यार कर ना'
थिरकी उंगली और ठहरे लम्हात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में
तुम ही कहो ना, कैसे लिपटी रात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में ॥
ज़ुल्फ बिछाओ, सोयेंगे हम; ज़ुल्फ में छुपकर रोयेंगे हम सावन देखे बिन बादल बरसात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में तुम ही कहो ना, कैसे लिपटी रात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में ॥ तुम ही कहो ना, कैसे लिपटी रात तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में......